महिलाओं को करनी चाहिए श्रीकृष्ण की पूजा

भगवान श्रीकृष्ण लीलावतार हैं। व्रज में उनकी लीलाएं चलती ही रहती हैं। श्रीकृष्ण स्वयं रसरूप हैं। वे अपनी रसमयी लीलाओं से सभी को अपनी ओर खींचते हैं। इसीलिए तो गोपियां प्राय: नंदभवन में ही टिकी रहतीं थीं। ‘कन्हैया कभी हमारे घर भी आयेगा। कभी हमारे यहां भी वह कुछ खायेगा। जैसे मैया से खीझता है, वैसे ही कभी हमसे झगड़ेगा-खीझेगा।’ ऐसी बड़ी-बड़ी लालसाएं उठती हैं गोपियों के मन में। श्रीकृष्ण भक्तवांछाकल्पतरू हैं। गोपियों का वात्सल्य-स्नेह ही उन्हें गोलोकधाम से यहां खींच लाया है। श्रीकृष्ण को अपने प्रति गोपियों द्वारा की गयी लालसा को सार्थक करना है। इतना ही नहीं वो श्रीकृष्ण ही थे जिन्होंने कौरवों की सभा में दौपदी की लाज बचाई थी। आइये हम आपको बताते हैं कि श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करना महिलाओं के लिए कैसे लाभदायक हो सकता है।
1- जो महिलाएं खुद को अकेला और बेसहारा समझती हों, वे श्रीकृष्ण सूक्त का पाठ करें।
2- जो महिलाएं सुंदर नहीं हैं, परंतु अपना व्यक्तित्व निखारना चाहती हों, वो श्रीकृष्ण के बीज मंत्र की माला जन्माष्टम से प्रारंभ करें, उनके व्यक्तित्व में जरूर आकर्षण आएगा
3- यदि आप बहुत ही शर्मीली हैं, अपनी बात कह नहीं पाती हैं, तो भगवान कृष्ण की अराधना करें
4- अच्छे और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रुक्मिणी मंगल का पाठ करें
5- यदि आपकी कुंडली में सर्प योग हो, तो जन्माष्टमी के दिन कालिदेह की वृत की कथा का अमृत लें, सर्प दोष दूर हो जाएगा।
6- महिलाओं को जो श्रंगार की प्राप्ति होती है, वह बिना श्रीकृष्ण की कृपा के संभव नहीं
7- नृत्या, कला, गायन, वादन, पाक कला ये सभी महिलाओं को श्रीकृष्ण की कृपा से ही प्राप्त होती है।




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