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आधुनिक मार्केटिंग के जन्मे ये कलयुगी स्वमंभू बाबा

बाबा राम रहीम, आसाराम बापू, नित्यानंद स्वामी, इच्छाधारी बाबा उर्फ भीमानंद महाराज, बाबा रामपाल, राधे मां आदि यह वो नाम हैं जो अपनी कालगुजारियों के कारण चर्चा का विषय बने हुए हैं या कभी रहे हैं। अब आप अनको संत, उपदेशक, जगतगुरु, महामंडलेश्वर, पाठाधीश्वर, ज्योतिषाचार्य जिस किसी भी नाम से जानते हों, लेकिन असल में ये ऐसे लोग हैं जिन्होंने भगवा चोला पहनकर ना सिर्फ लोगों को उल्लू बनाया बल्कि उनहें लूटने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। सतही तौर पर यह लोग धर्मगुरु, बाबा या मां के नाम से जाने जाते हैं, लेकिन असल में यह लोग आधुनिक मार्केटिंग के सहारे 24 घंटे टीवी पर छाए रहना पसंद करते हैं। अपने भक्तों के सामने नाच-गाकर मनोरंजन कर उनका दिल बहलाते हैं।

यकीन मानिये जिन साधू -संतों को बारे में आपने अपने पूर्वजों से सुना होगा, किताबों में पढ़ा होगा या धार्मिक सीरियल में देखा होगा यह बिलकुल ऐसे नहीं हैं। इन लोगों का ना तो सन्यास से कोई वास्‍ता है और ना ही यह ऐसा जीवन जीने की लालसा रखते हैं। इन लोगों ने धार्मिक किताबें शायद ही कभी पढ़ी होंगी, लेकिन जब यह अपने भक्तों के सामने प्रवचन देने के लिए जाते हैं तो ऐसा लगता है कि इनसे बड़ा इस संसार में कोई ज्ञानी ही नहीं है। इनके पाखंडी प्रवचनों या कहें नाच-गाने वाले हाई वोल्‍टेज ड्रामों  का सिर्फ एक ही मकसद होता है कि कैसे अपने सामने बैठे शिकार को फंसाकर उनसे मोटा पैसा ऐंठ सकें।

खुद को भगवान बताने वाले ये स्वयंभू बाबा मार्केटिंग के हर हथकंडे को पहचानते हैं आप इसका उदाहरण इनकी पहनावे से भी देख सकते हैं। इनके पहनावे से इनका पाखंड साफ-साफ झलकता है। हर धर्मगुरु का अपना एक ड्रेस कोड आपको दिखाई देखा…कोई श्वेतवस्त्र पहनना पसंद करता है तो कोई केसरिया, कोई नीला तो कोई पीला, कोई रेशमी स्टाइलिस्ट रंग का चोला पहन कर पाखंड करता है तो कोई मां दुर्गा का रूप बताकर अपने आपको मां कहलवाना पसंद करता है। किसी के माथे पर केवल चन्दन की बिंदी होती है तो किसी का पूरा माथा चंदन की अलग-अलग आकृतियां लिए होता है।

आज के ज्यादातर धर्मगरू अपनी पूरी टीम और आकेस्ट्रा के साथ उपदेश देने के लिए निकलते हैं। इन बाबाओं का जनता को मूर्ख बनाने के लिए अपना प्रेस होता है, किताबें, भजन के कैसेट भी होते हैं जिनसे इनका व्यवसाय भी साथ-साथ चलता रहता है। इनके पास करोड़ों की संपत्ति है। इनके सिंघासन भी सोने चांदी के बने होते हैं। उन पर मखमली गद्दे पड़े होते हैं। इनको देखकर लगता है कि भगवान को इन्होंने अपने हिसाब से बांट लिया हो।




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