narayangiri-muktidham

गिद्ध और कौवा राजनेता बने: नारायण गिरि

टकसाल स्थिति पंच दशानन जूना अखाड़े के पंचमुखी हनुमान मंदिर में महंत जी आसन पर विराजमान है। भोग-प्रसाद को दौर चल रहा है। बीच- बीच में महंत जी न्‍यूज चैनलों को बदल-बदल कर भी देख लेते हैं। टाईगर उनका स्‍नेहपात्र है। वह बीच बीच में उछल कूछ करता रहता है। श्री नारायण गिरि जी महाराज धर्म के लिए पूरी तरह समर्पित महंत हैं। खुद को अज्ञानी और अनपढ़ बताते हैं पर पढ़े लिखे ज्ञानियों का आचरण। देश की मौजूदा दशा से मर्माहत हैं। लेकिन निर्विकार रूप से फिल्‍म देख रहे हैं। राजनेताओं, डाक्‍टर, इंजीनियर, नौकरशाह और पत्रकारों को वह देश की मौजूदा दशा के लिए जिम्‍मेदार मानते  मानते हैं। कहते हैं इनसे जिस दिन मुक्ति मिल जाएगी देश संभल जाएगा।

महंतजी राजनेताओं के नकारापन से इतने आहत हैं कि इनकी उपमा गिद्ध और कौआ से करने से नहीं चूकते। कहते हैं कि आजकल शहर में कौवों की कांव कांव होते देखी है। अच्‍छा क्‍या ऐसा नहीं लगता कि शहर में कौवों की नस्‍ल  विलुप्‍त होना शुरू हो गई है। गिद्ध के तो अब दर्शन ही दुर्लभ हो गए हैं। पता है क्‍यों कभी रिसर्च किया। कलयुग में गिद्ध और कौवा अपना रूप बदलकर राजनीति में शामिल हो गए हैं। यही कारण है कि राजनीति में कांव-कांव के स्‍वर बढ़ गए हैं। गिद्ध इनके पंच बन गए हैं। तभी तो राजनीति का पतन हो रहा है। आपको पता है कि गिद्ध की पहचान क्‍या है। किस ओर संकेत करता है। शुभ या अशुम। कौवा कांव-कांव के जरिए किस तरह की सूचना देता है। इसे समझ लोगो तो तुम्‍हे भी लगेगा वाकई गिद्ध और कौवे राजनेता बन गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वह खुश हैं। कहते हैं कि मोदी भी सन्‍यासी है। उसका अपना क्‍या है। बढि़या काम कर रहा है। हमें राजनीति से क्‍या लेना देना। हमें तो शंख ही बजाना है। पर मीडिया को भी अपनी हदों का ध्‍यान रखना चाहिए। समय काल और परिस्थितियां भी देखनी चाहिए।




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *