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यंत्रों में साक्षात विराजते हैं हनुमान जी

jaygovind
देश के ख्यातिप्राप्त ज्योतिषविद् पं. जयगोविन्द जी शास्त्री मुक्तिधाम के पाठकों को बता रहे हैं हनुमान यंत्र का महत्व

यंत्रों में साक्षात विराजते हैं हनुमान जी

मारूत-नंदर श्री हनुमान जी को यंत्र साधना के द्वारा भी प्रसन्न किया जा सकता है। क्योंकि इनमें हनुमान जी महाराज स्वयं विराजमान रहते हैं। मुक्तिधाम के पाठकों को यही बता रहे हैं देश के ख्यातिप्राप्त ज्योतिषविद् पं. जयगोविन्द जी शास्त्री
yantra one
उद्यन्मार्तण्डतेजः प्रसर परिगतारक्त मेरू प्रभाभं
वज्र प्रान्तानुकारि प्रखर नरण मुखा घात सदारितारिम्।
लोलल्लग्ड् लंलीला लुलित खलदलो द्याम दर्पान्ध जालं।
कालं क्रूर ग्रहाणां शत भय शमन नौमि वायोः सुबालम्।
मैं प्रायः कालीन उदाय सूर्य के तेजः प्रसार व्याप्त होने के कारण लाल मेरूपर्वत के सदृश आकार वाले वज्र की नोक   के समान तीक्ष्ण नखों के प्रहार से शत्रुओं को विदीर्ण कर देने वाले, चंचल पूँछ की लीला से दुष्टों के उद्याम दर्प के   अंधजाल को तोड़ने वाला क्रूर ग्रहों के भी काल सैकड़ों विभिषिकाओं को शमन करने वाले वायुपुत्र हनुमान की   वन्दना करता हूँ। अणिमा, महिमा, गरिमा, लधिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठों सिद्धियां सम्यकरूप   से मारूतिनन्दन में प्रतिष्ठित थी।
यही नहीं इन आठों सिद्धियों के साथ-साथ नौ रिद्धियों पर भी हनुमान जी का एकाधिकार था, इन्हें यह वरदान माता सीता जी ने
दिया था,
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीनि जानकी माता,
इन्हीं आठ सिद्धियों और नौ निधियों के मकड़जाल में मनुष्य का जीवन भ्रमण करता हुआ इन्हें ही तलाशता  रहता है। परन्तु ये सभी को मिल जाये ऐसा जरूरी नहीं है। क्योंकि साधना वश इनमें से एक भी किसी प्राणी को मिल गयी तो वह पूर्णतः भौतिक संसार की चकाचौंध में इस प्रकार खो जाता है कि स्वयं को भी तलाश करना उसके लिए मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा होता है। हनुमान जी चारों युगों में विद्यमान थे और हनुमान में इनकी लीली अलग-अलग थी लेकिन सारांश एक ही था कि भगवान विष्णु की सेवा करते हुए भक्ति की बात जरूरी है तो मारूति नन्दन का नाम सूर्य की भांति चमकता है। जन सामान्य अथवा गृहस्थ भाईयों के लिए सभी कष्टों से छुटकारा दिलाने में कलियुगी बाधा से बचाने के लिए भगवान रूद्रावतार श्री हनुमान जी की आराधना श्रेष्ठ कही गयी है। देवों में हनुमान जी और देवियों में माता वैष्णों की महिमा अपार है। हनुमान अराधना काफी सरल है। और शायद पहली ऐसी साधना है जिसका बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। देश हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुन्दरकाण्ड आदि का पाठ करते हुए अपने कष्टों को दूर भगाते हैं। हर मंगल को हनुमान मंदिरों में भीड़ देखी जा सकती है जो भगवान हनुमान जी की कृपा बरसाने का परिणाम है।
yantra two

आजकल आम आदमी रोटी, कपड़ा और मकान के लिए तरसता दिखाई दे रहा है। ये तीनों वस्तुयें जिसे मिल जायें वह अपने को परम भाग्यशाली मानता है। किन्तु मजे की बात तो यह है कि इन तीनों के होते हुए भी किसी न किसी कारण वह मानव परेशान रहता है। कहीं गृहकलेश, कहीं शत्रुता तो कही परिवार में हो रही निरंतर अकाल मृत्यु और कहीं व्यापार बाधा अथवा भूतप्रेत बाधा आदि से छुटकारा दिलाने के लिए एकादश रूद्रावतार कालजयी भगवान हनुमान के अमोघ यंत्र मारूति यंत्र के बारें में कुछ जानकारी देने का प्रयत्न करता हूं। जो भी साधक भक्त, अथवा नास्तिक भी इस यंत्र का प्रयोग करे वह दैहिक, दैविक , और भौतिक त्रिविध तापों से मुक्त रहेगा। सामान्यतः इस यंत्र का प्रयोग लोग कार स्कूटर के अगले हिस्से में लगाते हैं। जिससे मारूति नन्दन की कृपा से वाहन दुर्घटना न हो।

यह यंत्र ताम्र का मिले तो भी सर्वोतम ही रहेगा। लेकिन मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर में जाकर इस मंत्र को जो अब दिया जा रहा है 1008 बार जप करें तथा शक्ति पूजन सामग्री से प्राण प्रतिष्ठा करें। अगर ताम्र पात्र का यंत्र न मिलें तो भजपत्र पर अष्टंगंध से बनाकर सिन्दूर लाल पुष्प आदि से यंत्र की पूजा करते हुए ही जाप करें।

ऊँ मारूतात्मने नमः हरि मर्कटमर्कटाय स्वाहा,
ऊँ क्लीं रं रं मारूते रं रूं डं जं डं जं डं।
yantra three

 इस मंत्र के जाप ये यंत्र में दिव्य शत्ति आ जाती है। और यंत्र आपकी सुख समृद्धि के लिए आपत्तियों से छुटकारा दिलाने के  कवच की तरह काम करता है। यंत्र वाहन में लगाने से वाहन पूर्णतः सुरक्षित रहता है। और निर्वाध गति से चलता हुआ  अपने गन्तव्य स्थान तक पहुँचता है। यही यंत्र शत्रओं पर विजय मुकद्मों में सफलता तथा भूतप्रेत बाधाओं और घर के वास्तु  को भी ठीक रहता है। मारूति यंत्र में साक्षात् हनुमान जी विराजते हैं। अतः घर में रखने से बाहरी हवा अथवा नकारात्मक  ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता। आजकल इस यंत्र का भारी संख्या में प्रयोग किया जा रहा है। आप भी इसका हर प्रकार से लाभ  उठा सकते हैं।

 ऊँ ऐं श्रीं हां हीं हं हौं ऊँ नमों महाबल पराक्रमाय भूत प्रेत पिशाच ब्रह्म  राक्षस शाकिनी डाकिनी यक्षिणी-पूतना मारी महामारी राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकान् क्षणेन हन हन भज्जय भज्जय मारय मारय शिक्षय शिक्षय महामाहेश्वर रूद्रावतार । ऊँ हं कट् स्वाहा। ऊँ नमो भगवते हनुमदाख्याय रूद्राय सर्वदुष्ट जन मुखस्तम्भनं कुरू कुरू स्वाहा। ऊँ हीं हीं हं ठं ठं ठं फट्  स्वाहा।

इस मंत्र के मारूति यंत्र को साथ रखकर यथाशक्ति पूजन सामग्रि से पूजा करके 11 हजार बार ब्रह्मचार्य रखते हुए पाठ करें। ऐसा करके प्राणी दैहिक दैविक और भौतिक त्रितापों और त्रिदोषों वातवित् और कफ से छुटकारा पाता है। मंत्र जाप से पहले गणेशादि नमस्कार अवश्य कर लें।



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